Our Visions

आदरणीय समाज बंधुओं, सादर वन्दन !! जय माता जी सा !!

अपनी भावनाओं को शब्दों का रूप देने का प्रयास करते हुए आप सभी का सहयोग समाज में अपेक्षित है| हम सभी मिलकर समाज को आगे बढ़ाने, समाज के विकास के लिए प्रयासरत है और रहेंगे| अपना समाज आज अति भावुकता, बेरोजगारी, अशिक्षा, दहेज प्रथा, शराब प्रथा और मृत्युभोज के चलते नीचे गिरता जा रहा है| पुरखों ने रक्त की श्रेष्ठ्ता बनाई रखी व गौरवशाली इतिहास हमें सौंपा उसे हम सही अर्थों में आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं| हमारी इस अवस्था में पहुंचने के कुछ मुख्य कारण हैं| जिन्हे हम सब को संकल्प बद्ध होकर उन्हें जड़ से उखाड़ना होगा| पिछलों ने क्या कमियां रखी उन पर बात ना करके वर्तमान में हम क्या कर सकते हैं, इसी पर ध्यान केंद्रित करना होगा|

बेरोजगारी – पहले समाज के विकास के लिए हमें समाज में फैली बेरोजगारी हटानी है| बेरोजगारी की वजह से समाज में कई बीमारियां फैलती जा रही है, जैसे अशिक्षा, कुपोषण, सामाजिक कुरीतियां आदि| हम सभी अवगत हैं की वर्तमान सवैंधानिक व्यवस्था में हमें संपन्न मान लिया गया है| नीति निर्माणकर्ताओं ने राजे रजवाड़ों को ही ध्यान में रखकर संविधान में गरीब पिछड़े राजपूतों को नजर अंदाज कर दिया| आरक्षण ने हमारे हक को बुरी तरह प्रभावित किया और प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्दा प्रदर्शन करने के बावजूद भी सरकारी नौकरियों में पिछड़ गये| हम सभी समाज के नौकरी करने वालों और व्यवसाय करने वालों से प्रार्थना करते हैं की वे समाज के बेरोजगार लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी दिलवाने के पुनीत कार्य करें और समाज से बेरोजगारी को खत्म करने में मदद करें| इससे समाज की आर्थिक स्तिथि सुधरेगी और समाज मजबूत होगा|

शिक्षा – दूसरा प्रयास हमारा यह है की अब राजपूत समाज को शिक्षा को ही अपना हथियार बनाना होगा| अब शिक्षा समाज का ऐसा हथियार होगा जिसके फलस्वरूप हम आगे बढ़ सकते हैं| हम सभी लोग उच्च शिक्षा लें और जो छात्र-छात्राएं किसी कारणवश या आर्थिक स्तिथि के कारन आगे पढ़ नहीं पा रहे हैं, समाज के समृद्ध लोग आगे आएं और उन्हें आगे पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएं जिससे समाज आगे बढ़ सके| समाज के छात्र-छात्राओं को IAS, IPS, RAS, RJS आदि प्रशाशनिक सेवाओं के लिए तैयार करें|

कुरीतियां – हमारा तीसरा प्रयास समाज में फैली कुरीतियों को मिटने के लिए होगा| जैसा की हम सभी जानते हैं की अभी भी समाज में अनेक कुरीतियों का प्रचलन है जिसके फलस्वरूप समाज का आगे विकास नहीं हो पा रहा है| हम बात कर रहे हैं दहेज़ प्रथा, शराब प्रथा और मृत्यु भोज की| इनकी समाज में अब कहीं भी जगह नहीं होनी चाहिए| हम सभी जानते हैं की शराब प्रथा राजपूत समाज के पतन का मुख्य कारण है| शराब और अफीम हर सांस्कृतिक अवसर का दस्तूर है, नहीं पता ये बुराई समाज में किस तरह फैली, नशा विवेक का हरण करता है और अविवेकी व्यक्ति कभी सही निर्णय नहीं ले पता| परिवारों में असामयिक मौतें, झगडे, विधवाएं और भी अनगिनत सौगातें दी है शराब प्रथा ने, हमारे समाज की ये नंबर एक दुश्मन है जिसे सबसे पहले समाप्त करना है|

दहेज़ प्रथा ये इतनी बड़ी समस्या बन चुकी है घर में बेटी का जन्म एक दुःख की घटना बन जाती है| हालांकि समाज में बेटियों को स्कूल भेजने की शुरुआत हो चुकी है लेकिन उनकी शादी के लिए दहेज़ जुटाना हर किसी के बस की बात नहीं| नतीजन परिवार कर्ज में डूब जाता है जिसका परिणाम शिक्षा के साथ समझौता, स्वास्थय के साथ समझौता या जमीन की बिक्री होता है| समाज को ऊपर उठाना है तो इसे बिलकुल त्यागना होगा क्यूंकि दहेज़ लेने से लेने वाला घर तो ऊँचा नहीं आएगा बल्कि देने वाला जरूर डूब जायेगा| वैसे भी दुनिया में कन्यादान से बढ़कर कोई दूसरा दान नहीं होता| अगर हम उस कन्यादान को लेने के पश्चात भी अगर दहेज़ की मांग करते हैं तो वो हमारी सबसे बड़ी भूल होगी और उसका पश्च्याताप करने के लिए ईश्वर कभी भी हमें मौका नहीं देगा, इसलिए दहेज़ प्रथा एक अभिशाप है इसे ख़त्म करना होगा|

अब बात करते हैं मृत्युभोज की, हमें मृत्युभोज को भी ख़त्म करना होगा| मृत्युभोज एक अभिशाप है, अतः हमें समाज से इसे समाप्त करना होगा|

क्षत्रिय समाज को अपना कर्म और धर्म निभाना चाहिए और एक क्षत्रिय का कर्म और धर्म है – !!! जनता की रक्षा करना धर्म की रक्षा करना अन्याय के खिलाफ लड़ना और जरुरतमंदो की सेवा करना| !!!

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